12-Jun-2007

ग्लोबल वार्मिंग कम करने हेतु उपग्रहों का प्रयोग

ग्लोबल वार्मिंग कम करने हेतु उपग्रहों का प्रयोग

पृथ्वी पर बढ़ते तापमान (ग्लोबल वार्मिंग) को कम करने हेतु एक अच्छा उपाय सुझाया है-- डेण्टोन, अमेरिका के मि. क्रिश विलिस ने - कि एक विशाल सूर्य ढाल (Sun Shield) बनाकर अन्तरिक्ष में पृथ्वी की भूस्थिर कक्षा में प्रक्षेपित करके स्थापित दी जाए, जो एक उपग्रह की तरह पृथ्वी का चक्कर इस प्रकार लगाती रहे कि हमेशा पृथ्वी और सूर्य के बीच सामने बनी रहे और विशेषकर भूमध्यसागरीय क्षेत्र से सूर्य के 3 प्रतिशत प्रकाश को अन्तरिक्ष में ही परावर्तित कर दे और धरती पर न पहुँचने दे। इससे धरती के तापमान में 5-6 प्रतिशत कमी आ सकती है।

उन्होंने बताया है कि इतनी बड़ी परावर्तक तश्तरी/शील्ड को पृथ्वी से प्रक्षेपित करना काफी कठिन और खर्चीला होने के कारण इसे चाँद पर एक अर्थ-स्टेशन बनाकर वहाँ से प्रक्षेपित करने की सलाह दी है तथा इसकी व्यापक विधि भी अपने ऊपर संकेतित वेबपृष्ठ पर बतलाई है।

उन्होंने इस पर आनेवाली लागत को अमेरिकी सरकार के एक वर्ष के बजट का सिर्फ 3 प्रतिशत बताया है। परन्तु बिल्ली के गले में घण्टी कौन बाँधे? शायद भविष्य में उनके सुझाव को कार्यान्वित करने के लिए कोई आगे आए- इसकी प्रतीक्षा है!लेकिन इसमें भी कुछ लोगों को आशंका है कि यह सूर्य के मानव के लिए हितकारी मुख्य प्रकाश को कहीं अवरुद्ध कर सकती है और बाहरी हानिकारक (लपटों वाले) हानिकारक प्रकाश को धरती पर अधिक फैलने का खतरा बढ़ा सकती है। प्रश्न उठता है कि इस ढालरूपी उपग्रह से सूर्य हमेशा ग्रहणग्रस्त हुआ क्या नहीं माना जाएगा?

कुछ लोगों ने उन्हें सुझाव दिया है कि ऐसे परावर्तक उपग्रह-तश्तरी का दोहरा उपयोग भी किया जा सकता है। सर्दियों के दिनों में इस उपग्रह-ढाल को उलटाकर इस प्रकार प्रतिस्थापित किया जा सकता है, ताकि अधिकाधिक धूप पृथ्वी की ओर परावर्तित कर सके, विशेषकर अधिक ठण्डे क्षेत्रों की ओर। ताकि लोगों को ठिठुरती ठण्ड से कुछ राहत मिल सके।

आधुनिक युग में उपग्रहों का प्रक्षेपण करके विविध उपयोग किया जा रहा है। हर महीने एक-दो नए उपग्रह विभिन्न राष्ट्रों द्वारा प्रक्षेपित किए जा रहे है। संचार, मौसम, अनुसन्धान, भूगोल, जलवायु-प्रबोधन तक ही सीमित नहीं रहे हैं, इनके उपयोग, बल्कि जासूसी, युद्ध के लिए भी कई उपग्रह अन्तरिक्ष में प्रस्तुत हैं। ईराक के साथ युद्ध में ऐसे जासूसी उपग्रहों का उपयोग करके ही अमेरिका ने सद्दाम हुसैन को नेस्तनाबूत करने में सफलता पाई थी।

लेकिन ऐसे प्रकाश परावर्तक-तश्तरीवाले उपग्रहों का विनाशकारी उपयोग भी किए जाने की आशंकाएँ उपजती है। सर्य के प्रकाश को सागर-जल पर परावर्तित तथा संकेन्द्रित करके पानी में उबाल पैदाकर स्थल विशेष पर निम्नदाब सृजित करके चक्रवात व तूफान भी छेड़े जा सकते हैं। किसी स्थल विशेष पर अत्यधिक ताप पैदा करके अग्निकाण्ड किए जा सकते हैं। जंगलों में आग लगाई जा सकती है।

उपग्रहों के प्रयोग द्वारा 'गूगल अर्थ' कितने सटीक मानचित्र इण्टरनेट के माध्यम से प्रदान कर पा रहा है, इस तथ्य से आज बच्चे भी परिचित हैं। ये मानचित्र आज आम आदमी तक उपलब्ध हो रहे हैं। उपग्रहों में लगे शक्तिशाली एक्स-रे कैमरों से अब पृथ्वी के गर्भ में छिपी खानों के खनिज भण्डारों का भी पता लगाया जाने लगा है।

कुछ वर्षों पहले सूर्य के प्रकाश को धरती की ओर परावर्तित करनेवाले एल्यूमिनियम से बने एक लघु चन्द्रमा जैसे उपग्रह का प्रक्षेपण करके सफल प्रयोग करके देखा जा चुका है, जो रात में भी एक क्षेत्र विशेष को रोशनी से प्रकाशित करता था।

परन्तु अतः यदि ग्लोबल वार्मिंग कम करने में ऐसे ढाल रूपी उपग्रहों का प्रयोग किया जा सके तो यह एक रचनात्मक कदम होगा और इसे एक बहुत अच्छा जन-हितकारी उपाय माना जाएगा।

2 comments:

Shrish said...

आश्चर्य है क्या ऐसा संभव है! इस प्रकार की विशाल ढाल क्या बनाई जा सकती है प्रक्षेपित करना तो बाद की बात है?

Shastri J C Philip said...

आप जो वैज्ञानिक जानकारी प्रदान कर रहे हैं वह बेहद जनोपयोगी है. लिखते रहें -- शास्त्री जे सी फिलिप