19-Jan-2012

Speech to text SMS
सिर्फ बोल कर भेज सकेंगे लिखित एसएमएस


भारत के आंध्र प्रदेश में हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान [आईआईआईटी] एक ऐसी मोबाइल प्रौद्योगिकी विकसित करने पर काम कर रहा है जो बोले गए शब्दों को 'इनपुट' के तौर पर ग्रहण करेगी और इसे भारतीय भाषाओं के लिखित पाठ में तब्दील कर देगी जिसे एसएमएस के तौर पर भेजा जा सकेगा।

आईआईआईटी के निदेशक श्री राजीव संगल ने बताया कि परियोजना अगले दो साल में तैयार हो जाएगी और इसके लिए सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय वित्तीय सहायता मुहैया करा रहा है।

श्री संगल ने कहा कि अगर कोई पढ़ना या लिखना नहीं जानता है तो जो संदेश वह किसी अन्य व्यक्ति के पास भेजना चाहता है उसे वह नई प्रौद्योगिकी की मदद से फोन पर या एसएमएस पर बोल कर लिखवा सकेगा। इसके लिए पहले उसे अपनी बात बोलनी होगी और मोबाइल फोन उसे लिखित पाठ में तब्दील कर संदेश के तौर पर भेज देगा।

उन्होंने बताया कि इस परियोजना पर सात अन्य संस्थान काम कर रहे हैं। संगल ने कहा कि यह प्रौद्योगिकी मोबाइल फोन में उपयोगी रहेगी जिनमें छोटे स्क्रीन और छोटे कीबोर्ड होते हैं जिसकी वजह से अक्षर टाइप करने में दिक्कत होती है।

संकाय के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि आईआईआईटी की स्पीच लैब का उद्देश्य ऐसी प्रणालियों का विकास करना है जो बोले गए शब्दों का लिप्यंतरण कर सकें, भारतीय भाषाओं के लिए सही ध्वनि एवं उच्चारण उत्पन्न कर सकें, शरीर के चिह्नों जैसे उंगली के निशानों अथवा आखों की पुतलियों द्वारा व्यक्ति विशेष की पहचान कर सकें और वाक शैली में संवाद स्पष्ट कर सकें।

श्री संगल ने संस्थान की एक और परियोजना के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान दल मोबाइल फोनों के लिए लिखित शब्दों को पढ़ने वाली एक प्रणाली 'ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर' भी विकसित करने के लिए प्रयासरत है।

उन्होंने बताया कि ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर स्क्रीन पर लिखे शब्दों को हस्तलिपि पहचानने वाले एक उपकरण की मदद से पढ़ेगा। हम शलाका की मदद से मोबाइल फोन पर किसी भी भाषा में लिख सकते हैं। सेल फोन इसे पहचानेगा और उसके अनुसार ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर आगे का कदम उठाएगा।

संगल ने बताया कि संस्थान ने एक अंतर्राष्ट्रीय मोबाइल निर्माता के लिए एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित किया है जो हिंदी में लिखे एसएमएस पढ़ सकेगा। बहरहाल, उन्होंने मोबाइल फोन निर्माता का नाम नहीं बताया। विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रौद्योगिकी ग्रामीण भारतीय बाजारों के विस्तार के लिए उपयोगी साबित होगी जहा मोबाइल फोन निरक्षरता की वजह से अभी भी अपनी गहरी पैठ नहीं बना पाए हैं।

सौजन्य :   दैनिक जागरण, 19 जनवरी, 2012 http://www.jagran.com/news/national-technology-for-converting-speech-into-text-msg-8782895.html>

तथा
सन्मार्ग, 19 जनवरी, 2012, पृ.11

सन्दर्भ हेतु देखें क्या कम्प्यूटर क्रान्ति लायेगी हिन्दी क्रान्ति?

उल्लेखनीय है कि हिन्दी तथा ब्राह्मी लिपि आधारित अन्य भारतीय भाषाओँ की लिपियाँ ध्वनिविज्ञान की कसौटी पर खरी उतरती हैं। इनमें जैसे बोला जाता है वैसे ही लिखा जाता है। इसके विपरीत अंग्रेजी में एक शब्द का उच्चारण कुछ और होता है तो जिन अक्षरों को मिलकर वह शब्द बना है उन अक्षरों के एक एक कर उच्चारण किया जाए तो कुछ और ही होता है।

अतः बोलकर लिखित पाठ में बदलने के श्रुतलेखन सॉफ्टवेयर अंग्रेजी भाषा (लेटिन लिपि) में सही काम नहीं करते, 50 से 70 प्रतिशत तक ही सही शब्द प्रकट कर पाते हैं। बाकी को फिर से मैनुअल सम्पादन/सुधार करना पड़ता है। जबकि हिन्दी व भारतीय भाषाओं में श्रुतलेखन सॉफ्टवेयर 90 से 98 प्रतिशत तक शुद्ध पाठ प्रदान कर पाते हैं।

साथ ही अंग्रेजी में बोलकर पाठ प्रविष्टि करके लिखित पाठ में बदलनेवाले श्रुतलेखन सॉफ्टवेयर की निर्माण विधि शब्दकोश में शब्दों की उच्चारण की गई ध्वनि-क्लिप के डैटाबेस फील्ड को वर्तनी (स्पेलिंग) के लिखित पाठ में बदलने की पद्धति पर आधारित होती है, इसलिए ऐसे सॉफ्टवेयर भारी-भारीकम तथा अधिक हार्डडिस्क स्पेस और अधिक मेमोरी घेरते हैं।

इसके विपरीत भारतीय भाषाओं के श्रुतलेखन सॉफ्टवेयर केवल मूल वर्णों के ध्वनि-अणुओं को लिपि के मूल वर्णों में बदलने की सूक्ष्म तकनीक पर आधारित होते हैं, इसलिए अत्यन्त कम भंडारण स्पेस एवं अति कम मेमोरी घेरते हैं और मोबाईल फोन पर भी चल पाने में सफल होते हैं।

आशा है कि इन सॉफ्टवेयरों के बाजार में आने पर भारतीय भाषाओं के प्रयोग में क्रान्ति दिखाई देगी।

26-Jun-2011

नोकिया का सोलर मोबाईल फोन

नोकिया के सौर-ऊर्जा चालित सेलफोन का परीक्षण पूरा हुआ।

नोकिया ने हाल ही में अपने नए मोबाईल हैंडसेट C1-02 का परीक्षण पूरा कर लिया है, जो सौर-ऊर्जा द्वारा चालित सेलफोन है, जिसमें बैटरी चार्ज करने के लिए कोई प्लग ही नहीं है। इस मोबाईल फोन के पिछले हिस्से में लगाए गए सोलर पैनल से विद्युत शक्ति मिलेगी।




सौर-ऊर्जा द्वारा चलने वाले नोकिया C1-02 मोबाईल फोन का निर्माण ऐसी तकनीक से किया गया है, जिससे आशा है कि वर्तमान आम मोबाईल फोन में उपलब्ध होनेवाली- इण्टरनेट, संगीत/वीडियो-प्लेयर, फोटोग्राफी, खेल आदि विभिन्न आधुनिक सुविधाओं के लिए आवश्यक बिजली बिना चार्ज की जरूरत के उपलब्ध हो सके। सौर-ऊर्जा चालित सेलफोन से आशा की जाती है कि जहाँ भी सूर्य-प्रकाश उपलब्ध हो वहाँ से ऊर्जा लेकर इसकी बैटरी स्वतः चार्ज होती रहेगी।

इस मोबाईल फोन के कार्य-निष्पादन को परखने के लिए नोकिया ने C1-02 के कई सेट विभिन्न देशों और विभिन्न मौसमी स्थितियों वाले क्षेत्रों में भेजे थे। नोकिया के इस हरित क्रान्ति अभियान से आशा बंधती है कि, सौर-उर्जा की बाधाएँ दूर हो सकेंगी, रात्रि में भी फोन को बिजली से चार्ज करने जरूरत नहीं होगी तथा मोबाईल फोन को अपने बैग या जेब में रखने की लोगों की आदत छूटेगी, जहाँ सूर्य किरणें मोबाइल फोन तक नहीं पहुँच पाती। लोगो को यात्रा के दौरान चार्जर साथ लेकर जाने की जरूरत नहीं होगी। रेलवे स्टेशनों पर, विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर मोबाईल चार्जर के काउंटर लगाने में कमी आएगी।

एक अनुमान का हिसाब लगाएँ कि यदि एक मोबाईल के लिए एक दिन में औसतन 1 वाट की बिजली खपती है, यदि संसार की कुल 700 करोड़ की जनसंख्या में से 70 करोड़ लोग मोबाईल फोन का उपयोग करते हैं, तो 7 लाख किलोवाट अर्थात 700 मेगावाट की बिजली की जरूरत कम होगी।

हालांकि बाजार में मोबाइल फोन को चार्ज करने के लिए सोलर चार्जर भी उपलब्ध हैं। रेलगाड़ियों में भी फेरीवालों के पास से सिर्फ 50 रुपये में ऐसे चार्जर मिल जाते हैं। सफर करते वक्त ऐसे चार्जर काफी काम आते हैं।

02-May-2011

इण्टरनेट एक्सप्लोरर-8 में डिफॉल्ट फोंट बदलना

इण्टरनेट एक्सप्लोरर-8 में डिफॉल्ट फोंट बदलना
Default_font_setting_in_IE8



हिन्दी, संस्कृत आदि भाषाओं देवनागरी लिपि)में इण्टरनेट का उपयोग करनेवाले व्यक्तियों की शिकायत होती है कि उन्हें हरेक वेबपेज या ईमेल संदेश सिर्फ 'मंगल' फोंट में दिखाई देता है।

इसका कारण यह है कि 'देवनागरी' लिपि के लिए एस.एस.विण्डोज में 'मंगल' फोंट को डिफॉल्ट रूप में निर्धारित किया हुआ होता है। किन्तु प्रयोक्ता चाहे तो अपने ब्राऊजर में हरेक लिपि के लिए डिफॉल्ट फोंट बदल सकता है।

IE8 में

इण्टरनेट एक्सप्लोरर हरेक भाषा/लिपि के लिए एक डिफाल्ट फोंट सेट करने की सुविधा देता है। यदि किसी वेबसाइट/ईमेल संदेश की डिजाइन/लेआउट करते वक्त,किसी पाठ विशेष के लिए यदि फोंट का नाम निर्धारित नहीं किया जाता तो वह अपने आप उस भाषा के लिए सेट किए गए डिफाल्ट फोंट में ही प्रकट होता है।

यदि html पाठ में फोंट का नाम निर्धारित किया जाए तो गंतव्य स्थल पर वह उसी फोंट की तलाश करता है,यदि वह फोंट उस कम्प्यूटर में नहीं मिलता तो डिफाल्ट फोंट में बदल कर प्रकट होता है।

यदि आप IE8 उपयोग कर रहे हैं तो,इण्टरनेट एक्सप्लोरर में 'मंगल' के अलावा अन्य फोंट को भी डिफाल्ट फोंट रूप में सेट कर सकते हैं--

कैसे करें?

step-1--> ऊपर की पंक्ति में दाईं ओर अन्त में दिए गए ">>" चिह्न पर क्लिक करें।
step-2--> tools (menu) को क्लिक करें।
step-3--> अगले प्रकट हुए बक्से की सूची में से Internet Options को क्लिक करें।
step-4--> ऊपर General (Tab) को क्लिक करें।
step-5--> नीचे Fonts (Tab) को क्लिक करें।



step-6--> Language Script बक्से में drop down list में से "Devanagari" चुनें।
step-7--> Webpage font बक्से में प्रकट हुई सूची में से पसंद का फोंट(यथा- Kokila) चुनें।
step-8--> OK पर क्लिक करें।
step-9--> OK पर क्लिक करते हुए वापस लौटें।

अब आप जो भी हिन्दी वेबसाइट खोंलेंगे, वह कोकिला फोंट में प्रकट होगा।

वि.द्र. : IE8 की फोंट सूची में आपके कम्प्यूटर में इन्स्टॉल किए गए सभी Unicoded OT फोंट प्रकट नहीं होते, सिर्फ वही फोंट प्रकट होते हैं, जो माईक्रोसॉफ्ट द्वारा validated होते हैं।

06-Feb-2010

हिन्दी बोलने पर दण्ड का इलाज

अक्सर कुछ अंग्रेजी स्कूलों में हिन्दी में बोलने पर विद्यार्थियों को अपमानित किया जाता है, दण्ड दिया जाता है, इस पर कुछ बच्चे को आत्महत्या कर इसी सन्दर्भ में कुछ समाचार छपे हैं, जिनकी कड़ियाँ निम्न हैं-- http://groups.google.com/group/hindianuvaadak/browse_thread/thread/9095a5633a7a3368?hl=hi

इस समस्या के समाधान हेतु एक सरल उपाय निम्न घटना से प्रकट होता है--

भुवनेश्वर, ओड़िशा के एक प्रसिद्ध अंग्रेजी माध्यम से स्कूल के एक प्रिंसिपल महोदय, जो ईसाई पादरी (फादर) थे, ने स्कूल में बच्चों को आपस में बातचीत हिन्दी तथा अन्य प्रान्तीय भाषाओं में करते हुए सुनकर एक घोषणा करने की पूर्वसूचना दी -- कि

"जो विद्यार्थी/शिक्षक अंग्रेजी के अलावा अन्य किसी भाषा में बातचीत करता पाया जाएगा, उसे प्रतिशब्द रु.10 का जुर्माना देना होगा।"

इसके अगले दिन अभिभावक संघ (पैरेण्ट्स एसोसिएशन) के सचिव महोदय प्रिंसिपल साहब से मिलने गए और उनसे विभिन्न विषयों पर बातचीत करने लगे, यथा- "महोदय, हमने पिछले साल आपके स्कूल को रु.50000 का दान दिलवाया था, avenue plantation के लिए, उसका क्या हुआ, रास्ते के किनारे तो एक भी पेड़ नहीं है, भयंकर गर्मी में बाहर खड़ी हमारे कारें तप कर लाल हो जा रही हैं।" प्रिंसिपल महोदय सफाई देने लगे कि "हमने पेड़ लगवाए थे, बाड़ भी बनवाई थी, लेकिन आसपास के गरीब लोग उखाड़ ले गए, बाड़ भी जलावन हेतु ले गए। इत्यादि... इत्यादि..."

बातचीत के अन्त में पैरेण्ट्स एसोसिएशन के सचिव जी ने प्रिंसिपल महोदय से कहा कि "आप रु.170/- का भुगतान मुझे तुरन्त करें।"

प्रिंसिपल महोदय ने पूछा "किसलिए?"

उन्होंने कहा कि "जुर्माने के रूप में। क्योंकि आपने बातचीत के दौरान कुल 17 शब्द हिन्दी के बोले हैं। (you spoken 17 words in Hindi)."

प्रिंसिपल महोदय का चेहरा देखने लायक था। अन्त में सचिव महोदय ने तर्क दिया कि अंग्रेजी के 0xford के शब्दकोश में भी Gherao, Yoga, .... इत्यादि सैंकड़ों शब्द हिन्दी से ज्यों के त्यों लिए गए हैं। क्योंकि इनका कोई अंग्रेजी अनुवाद उपलब्ध नहीं करा पाए अंग्रेज। इन्हें बोलने पर हरेक अंग्रेजी भाषी व्यक्ति को भारतीय हिन्दी भाषी संघ को प्रतिशब्द 10 रुपये का जुर्माने का भुगतान करना होगा, आपकी ही घोषणा के समरूप।

Oxford अंग्रेजी शब्दकोश में जितने शब्द हिन्दी के शामिल किए गए हैं, उन्हें जितने अंग्रेजी भाषी व्यक्ति उच्चारण करेंगे, बोलेंगे, हरेक व्यक्ति से प्रतिशब्द दस दस रुपये जुर्माना वसूल करके भारत संघ को दिया जाए तो कुल कितने करोड़/अरब की आय होगी, जरा हिसाब लगाएँ आप सभी .... ...

अगले ही दिन प्रिंसिपल साहब ने प्रतिशब्द हिन्दी बोलने पर दस रुपये जुर्माना वसूले जाने की घोषणा रद्द कर दी।

अतः आज ही सभी हिन्दी भाषी मिलकर "भारतीय हिन्दी भाषी संघ" का गठन कर लें।

15-Sep-2009

हिन्दी जी-मेल को बिगड़ने से कैसे रोकें?

हिन्दी जी-मेल को बिगड़ने से कैसे रोकें?
How to stop Hindi Gmail being Corrupted


हिन्दी एवं अन्य युनिकोडित भाषाओं में लिखी गई ईमेल अक्सर गंतव्य तक पहुँचने तक बिगड़ जाती है तथा अन्य कूटों में बदलकर कूड़ा (Garbage) दिखाई देती है। जिसका कारण है -- कई पुराने ईमेल सर्वर युनिकोड (UTF8) एनकोडिंग को सम्भालने में सक्षम नहीं होते।

लेकिन जीमेल (Gmail) अर्थात् google mail पूर्णतः युनिकोड सक्षम है। इसके सर्वर नए और आधुनिक हैं।

फिर भी कई लोगों की Gmail से भेजे गए हिन्दी ईमेल भी गंतव्य तक बिगड़कर पहुँचते हैं। इसका कारण है उन्होंने अपने जीमेल खाते की सेटिंग settings ठीक से नहीं की है।

इस प्रकार सेटिंग्स करें :

Gmail में ऊपरी पंक्ति में स्थित settings पर क्लिक करें, यथा--








इसके पश्चात नीचे दिए गए चित्र अनुसार

Use Unicode (UTF8) encoding for outgoing messages के पहले वाले गोल स्विच को क्लिक करें-





फिर नीचे Save Settings बटन पर क्लिक करें।

अब आपके Gmail से भेजे गए हिन्दी में लिखे सन्देश गंतव्य तक पहुँचकर बिगड़ेंगे नहीं।