24-Mar-2007

इनस्क्रिप्ट की-बोर्ड ले-आऊट की समस्याएँ

CDAC,Pune के द्वारा भारतीय भाषाओं के कम्प्यूटर में इनपुट के लिए विकसित इन्स्क्रिप्ट(Inscript) की-बोर्ड की सबसे बड़ी खूबी है कि इसमें किसी भी भारतीय भाषाओं में कम्प्यूटर में इनपुट किया जा सकता है। सभी के लिए एक ही लेआउट है।

लेकिन इसकी सबसे बड़ी खराबियाँ निम्नवत् है:-

(1) मात्राओं को अलग से याद एवं टाइप करना पड़ता है। (जबकि भारतीय भाषाएँ मूल रूप में अंग्रेजी से भी अधिक सरल, सपाट और सीधी हैं। सिर्फ मूल व्यंजन+स्वर+अनुनासिकादि क्रम से समस्त अक्षर और संयुक्ताक्षर स्वयंचालित रूप से प्रकट हो सकते हैं।)

इस प्रकार कुल 16 कुँजिया अनावश्यक रूप से अधिक याद रखनी पड़ती है। जबकि इनकी कोई आवश्यकता ही नहीं है। इन 16 कुँजियों की जगह बहुधा उपयोग के चिह्न या अन्य वर्णों के लिए प्रयोग हो सकता था।

(2) ट, ठ, ड, ढ, नुक्ता, ऑ, य आदि अक्षर दाहिनी ओर कोने में होने के कारण छोटी उंगली से टाइप करना कठिन होता है और बारम्बार त्रुटियाँ होती हैं।

(3) देवनागरी में बहुधा प्रयोग में आनेवाले चिह्नों (punctuation marks = : ; ' " / ? ! आदि) के लिए भी बारम्बार "भाषा/लिपि toggle कुंजी" को दबाकर अंग्रेजी ले-आऊट में अनावश्य रूप से लौटना पड़ता है।

(4) हलन्त का बारम्बार अनावश्यक रूप से प्रयोग करना पड़ता है। उलटा क्रम चलता है। आधे अक्षर के लिए दो कुंजियाँ दबानी पड़ती है, जबकि पूरे अक्षर के लिए सिर्फ एक। जिससे ध्वन्यात्मक इनपुट में भारी बाधा आती है। इस दृष्टि से इन्स्क्रिप्ट को ध्वन्यात्मक आधार पर निर्धारित होना गलत सिद्ध करता है।

(5) यह उच्च गति से टंकण/इनपुट क्षमता प्रदान नहीं कर पाता। गलतियों की सम्भावनाएँ अधिक रहती हैं, विशेषकर दाहिने छोर पर स्थित कुँजियों से बननेवाले शब्दों में।

(6) व्यंजनों को दाहिनी ओर और तथा स्वरों को बाईं ओर उलटे क्रम में रखा गया है। जबकि व्यंजन के बाद ही स्वर लगता है। देवनागरी तथा भारतीय भाषाएँ मुख्यत: बायें से दायें क्रम में लिखी जाती हैं, न कि अरबी-फारसी की तरह दायें से बायें क्रम में। अतः व्यंजनों को बाईं ओर तथा स्वरों को दाहिनी ओर होना चाहिए था।

मेरे विचार में हिन्दी तथा भारतीय भाषाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ IME की अवधारणा 1984-85 में Former-NCST, Mumbai, (वर्तमान CDACMumbai) द्वारा विकसित 'विविधा' नामक सॉफ्टवेयर में प्रयोग की गई थी, जिसकी भारत सरकार के "इलेक्ट्रॉनिक कोर्पोरेशन ऑफ इण्डिया" द्वारा मार्केटिंग की जाती थी और जो सिर्फ 300 रुपये में बेचा जाता था। किन्तु यह DOS में चलता था, और Windows की लोकप्रियता तथा त्रुटिपूर्ण ISCII-1991 के मानकीकरण बाद यह अधिक प्रयोग में नहीं आ सका। आज आवश्यकता है इसको पुनर्जीवित करने की।

(7) इनस्क्रिप्ट की-बोर्ड में हिन्दी के अक्षर-विन्यास को अलग से तथा अंग्रेजी के अक्षर-विन्यास को अलग से याद करके टंकण अभ्यास की जरूरत होती है, जिससे दिमाग पर दोगुना बोझ पड़ता है।

(8) इन्सक्रिप्ट की-बोर्ड से और भी तेज गति से तथा गलती-रहित इनपुट किया जा सकेगा, यदि इसके लेआऊट में संशोधन किया जाए भारतीय भाषाओं की पूर्ण ध्यन्यात्मकता को ध्यान को रखते हुए। अतः आवश्यकता है इसमें और सुधार करने की।

9 comments:

मिर्ची सेठ said...

हरिराम जी,

आप अपने सुझावों से यदि की-बोर्ड लेआउट की छवि बना सकें तो शायद ज्यादा अच्छे से समझ आए। आपके काफी सुझाव समझ में आए कुछ नहीं आए। छवि बना सकें तो बहुत कृपा होगी।

पंकज

Shrish said...

आपका यह लेख बहुत पहले पढ़ा था पर तब खास समझ न पाया। बाद में जब खुद इनस्क्रिप्ट सीखा और कूछ समय इसमें लगाया तो आपकी बताई दिक्कतें खुद ही पेश आई और तब आपके इस लेख की याद आई। वाकई इनस्क्रिप्ट भी कमियों से मुक्त नहीं है। आवश्यकता है इसमें सुधार की, अपने कुछ विचार इस पर किसी पोस्ट में रखूँगा।

Shrish said...

"मात्राओं को अलग से याद एवं टाइप करना पड़ता है। (जबकि भारतीय भाषाएँ मूल रूप में अंग्रेजी से भी अधिक सरल, सपाट और सीधी हैं। सिर्फ मूल व्यंजन+स्वर+अनुनासिकादि क्रम से समस्त अक्षर और संयुक्ताक्षर स्वयंचालित रूप से प्रकट हो सकते हैं।)

इस प्रकार कुल 16 कुँजिया अनावश्यक रूप से अधिक याद रखनी पड़ती है। जबकि इनकी कोई आवश्यकता ही नहीं है। इन 16 कुँजियों की जगह बहुधा उपयोग के चिह्न या अन्य वर्णों के लिए प्रयोग हो सकता था।"


हरिराम जी इस बिंदु पर जरा प्रकाश डालिए, आप किन 16 कुञ्चियों की बात कर रहे हैं? अगर मात्राएँ कुञ्जीपटल में न होंगी तो उन्हें किस प्रकार टाइप किया जा सकेगा?

हरिराम said...

@shrish
इसे समझाने के लिए एक सचित्र तकनीकी आलेख प्रस्तुत किया जा रहा है।

sumit said...

क्या यार आपको दाहिनी ऐल्ट का इस्तेमाल नहीं मालूम? "?" को टाइप करने के लिए right alt+shift+/ करेंगे। दाहिनी ऐल्ट जिन निशानों को टाइप करने में इस्तेमाल होती है, उनमें वैसे मध्यमा उंगली का इस्तेमाल नहीं होता, ताकि मध्यमा से ऐल्ट दबाते हुए दूसरी उंगली से निशान का बटन या उसके साथ शिफ़्ट दबाई जा सके। ये एक तरीके से शिफ़्ट की तरह का ही इस्तेमाल है, जिससे एक बटन से तीन या चार अक्षर/निशान टाइप किए जा सकें।

Anonymous said...

अगर आप इंस्क्रिट की-बोर्ड के बारे में पढ़े तो आप को मालूम होगा कि जो सब आपको कमी लग रही हैं, वही इस की-बोर्ड की विशेषताएँ हैं। व्यंजनो को दायीं ओर रखा हैं ताकि उनको दाहिनें हाथ से टाइप किया जा सके। अधिकतर लोग दाहिने हाथ का अधिक प्रयोग करते हैं।

आधे अक्षर के लिए हलन्त, यह तो हिन्दी वर्णमाला का ही रुप हैं। पूर्ण व्यंजनों में हलन्त लगा कर ही अ की मात्रा का अनुपस्थिति दिखाई जाती हैं। और आधे व्यंजन कम प्रयोग होते हैं, इसलिए उनके लिए हलन्त का प्रयोग करे, पूरे अक्षर एक ही की से टाइप किये जा सकते हैं।

सभी शब्द व्यजंन स्वर क्रम में ही टाइप करने पड़ते हैं। इसमें दिमाग में अधिक जोर क्यों डालना पडता हैं।

इंस्क्रिट की-बोर्ड सही मायनों में धवन्यात्मक की-बोर्ड लेआउट हैं।
धन्यवाद के लिए ध न् य वा द टाइप करें, न कि dha n yaa vaa d.

मन की तरंग said...

बंधुवर आप की कीबोर्ड से जुड़ी सभी समस्‍याओं का समाधान बड़ी ही आसानी से हो सकता था, यदि टाइप राइटर की तरह से सभी अक्षरों को कीबोर्ड पर छाप दिया जाता। मेरे पूर्व कार्यालय (योजना आयोग) में जब इलेक्‍ट्रानिक टाइपराइटर खरीदे गए तो नेटवर्क नामक कम्‍पनी ने ऐसा की बोर्ड बनाया भी था, जिसमें रोमन और देवनागरी दोनों ही अक्षरों को उकेरा गया था। रोमन के अक्षर सामान्‍य तौर पर थे और देवनागरी के अक्षर प्रत्‍येक कीटॉप के सामने की बॉडी पर थे। बिल्‍कुल भी परेशानी नहीं होती थी और जो हिन्‍दी टंकण नहीं भी जानते थे वे भी देख देख कर धीरे-धीरे ही सही टंकण कर लेते थे। एक बार यदि कीबोर्ड पर वही व्‍यवस्‍था आ जाए तो वह चाहे इनस्क्रिप्‍ट ले आउट हो चाहे रैमिंग्‍टन, सारा काम हो जाएगा।

कम्‍प्‍यूटरों पर प्रयोग के लिए एनआइसी ने एक कीबोर्ड सिंगापुर से बनवाया भी था, पता नहीं किन कारणों से उसका प्रचार नहीं हुआ। वह भी ठीक उसी तरह से था जैसे - नेटवर्क कंपनी द्वारा बनाए गए कीटॉप्‍स में हुआ करता था। नानाप्रकार के कीबोर्ड लेआउट सॉफ्ट रूप में तो तैयार कर दिए गए लेकिन यदि हार्ड रूप में कीबोर्ड ही तैयार कर दिया जाए तो सारी समस्‍या समाप्‍त।

श्याम said...

आपका यह कहना कि व्यंजन पहले और स्वर बाद में आना चाहिए तो बंधु आपको ज्ञात होगा कि हमें बचपन में ही स्वर पहले और व्यंजन बाद में पढ़ाया गया था. मेरे विचार से इंस्क्रिप्ट की-बोर्ड का ले आउट काफी आसान एवं तेज गति प्रदान करता है.

हरिराम said...

@श्याम
भले ही वर्णमाला में स्वर पहले पढ़ें हों, लेकिन हरेक स्वर-मात्रा व्यंजन के बाद में ही लगती है ना...