इस समस्या के समाधान हेतु एक सरल उपाय निम्न घटना से प्रकट होता है--
भुवनेश्वर, ओड़िशा के एक प्रसिद्ध अंग्रेजी माध्यम से स्कूल के एक प्रिंसिपल महोदय, जो ईसाई पादरी (फादर) थे, ने स्कूल में बच्चों को आपस में बातचीत हिन्दी तथा अन्य प्रान्तीय भाषाओं में करते हुए सुनकर एक घोषणा करने की पूर्वसूचना दी -- कि
"जो विद्यार्थी/शिक्षक अंग्रेजी के अलावा अन्य किसी भाषा में बातचीत करता पाया जाएगा, उसे प्रतिशब्द रु.10 का जुर्माना देना होगा।"
इसके अगले दिन अभिभावक संघ (पैरेण्ट्स एसोसिएशन) के सचिव महोदय प्रिंसिपल साहब से मिलने गए और उनसे विभिन्न विषयों पर बातचीत करने लगे, यथा- "महोदय, हमने पिछले साल आपके स्कूल को रु.50000 का दान दिलवाया था, avenue plantation के लिए, उसका क्या हुआ, रास्ते के किनारे तो एक भी पेड़ नहीं है, भयंकर गर्मी में बाहर खड़ी हमारे कारें तप कर लाल हो जा रही हैं।" प्रिंसिपल महोदय सफाई देने लगे कि "हमने पेड़ लगवाए थे, बाड़ भी बनवाई थी, लेकिन आसपास के गरीब लोग उखाड़ ले गए, बाड़ भी जलावन हेतु ले गए। इत्यादि... इत्यादि..."
बातचीत के अन्त में पैरेण्ट्स एसोसिएशन के सचिव जी ने प्रिंसिपल महोदय से कहा कि "आप रु.170/- का भुगतान मुझे तुरन्त करें।"
प्रिंसिपल महोदय ने पूछा "किसलिए?"
उन्होंने कहा कि "जुर्माने के रूप में। क्योंकि आपने बातचीत के दौरान कुल 17 शब्द हिन्दी के बोले हैं। (you spoken 17 words in Hindi)."
प्रिंसिपल महोदय का चेहरा देखने लायक था। अन्त में सचिव महोदय ने तर्क दिया कि अंग्रेजी के 0xford के शब्दकोश में भी Gherao, Yoga, .... इत्यादि सैंकड़ों शब्द हिन्दी से ज्यों के त्यों लिए गए हैं। क्योंकि इनका कोई अंग्रेजी अनुवाद उपलब्ध नहीं करा पाए अंग्रेज। इन्हें बोलने पर हरेक अंग्रेजी भाषी व्यक्ति को भारतीय हिन्दी भाषी संघ को प्रतिशब्द 10 रुपये का जुर्माने का भुगतान करना होगा, आपकी ही घोषणा के समरूप।
Oxford अंग्रेजी शब्दकोश में जितने शब्द हिन्दी के शामिल किए गए हैं, उन्हें जितने अंग्रेजी भाषी व्यक्ति उच्चारण करेंगे, बोलेंगे, हरेक व्यक्ति से प्रतिशब्द दस दस रुपये जुर्माना वसूल करके भारत संघ को दिया जाए तो कुल कितने करोड़/अरब की आय होगी, जरा हिसाब लगाएँ आप सभी .... ...
अगले ही दिन प्रिंसिपल साहब ने प्रतिशब्द हिन्दी बोलने पर दस रुपये जुर्माना वसूले जाने की घोषणा रद्द कर दी।
अतः आज ही सभी हिन्दी भाषी मिलकर "भारतीय हिन्दी भाषी संघ" का गठन कर लें।
मूँह तोड़ जबाब!
ReplyDeleteश्री हरी राम जी , आपके ब्लॉग पर काफी दिनों बाद यह नयी पोस्ट दिखाई दी है | आपकी व्यस्तता समझ में आ रही है, यह विषय ही आपको मजबूर कर देता है समय निकालने के लिए | आपकी तरह सभी भारतीय ब्लोग्गर अगर हिन्दी का विकास चाहते तो तस्वीर अलग ही होती |
ReplyDeleteBhadhti Globlisation ke anusar hame English ki jankari hona awashyak hai, parantu English ke saath saath Hinki shabdon ka prayog karna koi apradh nahi. main to kahta hoon ki kisi bhi hindustani ke saath Hindi me hi baat karnai chahiye. Jaha jarurat ho waha English shabdon ka prayog karna chahiye.
ReplyDeleteDhanyawad.
shandar sir ji
ReplyDeleteaakharkalash.blogspot.com
are waah....waah..waah...waah....waah... int kaa javaab patthar....
ReplyDeleteबहुत खूब !! क्या गजब का जवाब दिया सचिव महोदय ने !! लाजवाब !!
ReplyDeleteGreetings from Argentine. Good post.
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