tag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post7317270803448056871..comments2007-11-24T17:18:27.329+05:30Comments on प्रगत भारत: देवनागरी “श” का रहस्यहरिरामhttp://www.blogger.com/profile/12475263434352801173noreply@blogger.comBlogger12125tag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-45750197796636492732007-11-24T16:59:00.000+05:302007-11-24T16:59:00.000+05:30पौराणिक ज्ञानवर्धक जानकारी उपलब्‍ध कराने के लिये ध...पौराणिक ज्ञानवर्धक जानकारी उपलब्‍ध कराने के लिये धन्‍यवाद। हो सकता हो कि संस्‍कृत के विद्वान श्वेता शब्‍द को इस प्रकार लिखने को प्राथमिकता और मान्‍यता देते हों। मेरी हिन्‍दी के एक प्रकाण्‍ड विद्वान से इस सम्‍बन्‍ध में चर्चा हुई तो उन्‍होंने इसे सिरे से नकार दिया है और इस पर क्षोभ व्‍यक्‍त किया है। साथ ही कहा है कि इस भेडचाल को रोकना मेरे अकेले के बस का नहीं है। उन विद्वान का नाम व पता आपके नीरज शर्माhttp://www.blogger.com/profile/02856956576255042363noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-79075714342807289572007-11-22T12:28:00.000+05:302007-11-22T12:28:00.000+05:30जानकारीपूर्ण लेख के लिए धन्यवाद.जानकारीपूर्ण लेख के लिए धन्यवाद.इष्ट देव सांकृत्यायनhttp://www.blogger.com/profile/06412773574863134437noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-58213206886558594972007-10-18T21:00:00.000+05:302007-10-18T21:00:00.000+05:30बहुत उपयोगी जानकारी थी यह मै इससे वंचित ही रह जाती...बहुत उपयोगी जानकारी थी यह मै इससे वंचित ही रह जाती अगर आज आपके चिट्ठे पर न आती...बहुत-बहुत शुक्रिया हरिराम जी...सुनीता(शानू)sunita (shanoo)http://www.blogger.com/profile/11804088581552763781noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-50213348253098272582007-10-17T20:37:00.000+05:302007-10-17T20:37:00.000+05:30बढिया लेख,मेरी भी कुछ शंकाओं का समाधान हुआ..बहुत ध...बढिया लेख,मेरी भी कुछ शंकाओं का समाधान हुआ..बहुत धन्यवाद हरिराम जी..Suresh Chiplunkarhttp://www.blogger.com/profile/02326531486506632298noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-75846480427627154812007-10-17T10:23:00.000+05:302007-10-17T10:23:00.000+05:30@सागर चन्द नाहर"मैने इस टिप्प्णी में ZWJ के लिये ^...@सागर चन्द नाहर"मैने इस टिप्प्णी में ZWJ के लिये ^(shift+6) कुंञी का उपयोग एक ही बार किया फिर भी सही शब्द टंकित हुआ।"यदि आप "श्व" को "श्‌व" रूप में लिखना चाहेंगे तभी आपको ZWNJ अर्थात् ^^ का प्रयोग करना पड़ेगा।@ संजय"सौभाग्‍य से मैं इस कीबोर्ड का इस्‍तेमाल नहीं करता हूं अत: मुझे ऐसी समस्‍याएं नहीं आतीं. श्वेतांबर या श्‍वेतांबर बिना किसी झंझट के लिख सकता हूं"आप रेमिंगटन कीबोर्ड लेआऊट का इस्तेमाल हरिरामhttp://www.blogger.com/profile/12475263434352801173noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-78908100568378928292007-10-17T04:57:00.000+05:302007-10-17T04:57:00.000+05:30एक और शानदार लेख। आपने सभी संशय दूर कर दिए। श् से ...एक और शानदार लेख। आपने सभी संशय दूर कर दिए। श् से बनने वाले सभी संयुक्ताक्षरों का पूर्ण ज्ञान हो गया। इतनी अच्छी और विस्तृत जानकारी तो व्याकरण की किसी पुस्तक में भी इकट्ठे मिलना दुर्लभ है। आपकी "देवनागरी लिपि का क्रम-विकास" नामक शृंखला बहुत अच्छी चल रही है। साधुवाद!Shrishhttp://www.blogger.com/profile/15264688244278112743noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-26123654849590499682007-10-17T00:27:00.000+05:302007-10-17T00:27:00.000+05:30जैसी आशा थी वैसा ही पाया. बेहद उपयोगी जानकारी है औ...जैसी आशा थी वैसा ही पाया. बेहद उपयोगी जानकारी है और इसके लिए साधुवाद. सौभाग्‍य से मैं इस कीबोर्ड का इस्‍तेमाल नहीं करता हूं अत: मुझे ऐसी समस्‍याएं नहीं आतीं. श्वेतांबर या श्‍वेतांबर बिना किसी झंझट के लिख सकता हूं. आपका आलेख पढ़ने के बाद ZWJ और ZWNJ के झमेले को जान गया और कम से कम अब मुझे अपने कीबोर्ड को बदलने के बारे में कोई ऊहापोह नहीं बची है. मेरी नजर में रेमिंगटन ही सर्वश्रेष्‍ठ है. रवि जी का Sanjayhttp://www.blogger.com/profile/06768651360493259810noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-39251726112833569252007-10-16T20:30:00.000+05:302007-10-16T20:30:00.000+05:30ज्ञानवर्धन के लिये आभार. बहुत सहेजने योग्य आलेख है...ज्ञानवर्धन के लिये आभार. बहुत सहेजने योग्य आलेख है.Udan Tashtarihttp://www.blogger.com/profile/06057252073193171933noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-74750924955308314722007-10-16T19:52:00.000+05:302007-10-16T19:52:00.000+05:30कमाल का लेख है.. मुझे पता नहीं था कि मेरे एक प्रश...कमाल का लेख है.. मुझे पता नहीं था कि मेरे एक प्रश्‍न से हमें इतनी जानकारी मिलेगी।एक बात कहना चाहूंगा कि मुझे व्यक्तिगत रूप से ZWJ टाइप करने से जो शब्द बनता है वह ज्यादा अच्छा लगा। गुजराती में भी श्‍वेतायन को श्वेतायन ही लिखा जाता है। बरहा IME में ZWJ को टाइप करने के लिए ^ (SHIFT+6) का तथा ZWNJ के लिए ^^ (दो बार SHIFT+6) का प्रयोग करना पड़ता है।मैने इस टिप्प्णी में ZWJ के लिये ^(shift+6) कुंञी Sagar Chand Naharhttp://www.blogger.com/profile/13049124481931256980noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-19949991256368210172007-10-16T19:26:00.000+05:302007-10-16T19:26:00.000+05:30आपने "श" वर्ण की पूरी गुत्थी को सुलझा कर रख दिया। ...आपने "श" वर्ण की पूरी गुत्थी को सुलझा कर रख दिया। आपके निष्कर्षों और सुझावों पर अमल किए जाने की जाने की जरूरत है। आपने ठीक कहा कि,- 1. "शृ" को भी पुराने रूप में डिफॉल्ट रूप से प्रकट होना चाहिए। जबकि इसे पुराने रूप में प्रकट करने के लिए कई व्यवस्था है ही नहीं।2. आवश्यकता है देवनागरी लिपि के ऐसे वैकल्पिक स्वरूपों वाले वर्णों को एक सर्वमान्य स्वरूप मानकीकृत किया जाए और सभी उसे अन्तर्राष्ट्रीय Srijan Shilpihttp://www.blogger.com/profile/09572653139404767167noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-48650016129344267922007-10-16T18:27:00.000+05:302007-10-16T18:27:00.000+05:30बहुत उपयोगी जानकारी देते हैं आप। देवनागरी तो रहस्य...बहुत उपयोगी जानकारी देते हैं आप। देवनागरी तो रहस्यों का खजाना है। कृपया अन्य वर्णों/अक्षरों की व्युत्पत्ति और देवनागरी लिपि के तन्त्र-शास्त्र-सम्बन्धी रहस्यों पर भी समय निकालकर तकनीकी-आलेख लिखें तो विश्वभर के सभी लोग उपकृत होंगे।Ratihttp://www.blogger.com/profile/07326887975864527904noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-2481504562817573054.post-55513383294206482742007-10-16T18:09:00.000+05:302007-10-16T18:09:00.000+05:30जानकारीपूर्ण लेख के लिए धन्यवाद।वैसे मुझे लगता है ...जानकारीपूर्ण लेख के लिए धन्यवाद।वैसे मुझे लगता है कि हिंदी में ZWJ और ZWNJ का इस्तेमाल न ही किया जाए तो अच्छा है। इससे अनावश्यक रूप से छाँटने और क्रमांकन में जटिलता आएगी, जैसे कि आपके गूगल के उदाहरण से जाहिर है।आलोकhttp://www.blogger.com/profile/03688535050126301425noreply@blogger.com